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ठियोग में नशा तस्कर की ₹1.64 करोड़ की संपत्ति सीज:नाई की दुकान चलाने वाले हैप्पी पर कार्रवाई; गाड़ी और बैंक खातों पर शिकंजा

शिमला पुलिस ने ठियोग में 71 ग्राम अफीम बरामदगी के एक मामले में आरोपी और उसके करीबियों से जुड़ी करीब 1.64 करोड़ रुपए की संपत्तियां सीज की हैं। इनमें जमीन, दो मंजिला दुकान, वाहन के अलावा बैंक और डाकघर खातों में जमा राशि शामिल है। दरअसल, ठियोग पुलिस ने 10 जून को गुप्त सूचना के आधार पर रहीघाट स्थित हॉस्पिटल रोड पर आरोपी सोहन लाल उर्फ हैपी की नाई की दुकान में दबिश दी थी। तलाशी के दौरान पुलिस ने दुकान से करीब 71 ग्राम अफीम बरामद की थी। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस के अनुसार सामने आया कि आरोपी लंबे समय से अफीम की अवैध तस्करी में संलिप्त था। वह ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू और आसपास के क्षेत्रों में अफीम की सप्लाई करता था। आय से ज्यादा मिली संपत्ति, वित्तीय जांच में खुलासा मामले की जांच के दौरान पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी और उसके निकट सहयोगियों की वित्तीय जांच शुरू की। पुलिस ने उनकी आय के ज्ञात और वैध स्रोतों, बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की। आरोपी की ये संपत्तियां सीज जांच में एक आवासीय प्लॉट, एक कृषि भूमि, दो मंजिला दुकान, वाहन और बैंक एवं डाकघर खातों में जमा धनराशि सहित करीब 1.64 करोड़ रुपए की संपत्तियों की पहचान की गई। पुलिस जांच में आरोपी की घोषित और ज्ञात आय की तुलना में उसकी संपत्ति अधिक पाई गई। परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य है हैप्पी पुलिस के अनुसार, आरोपी नाई की दुकान चलाता है और परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य है। हालांकि उसकी आय और अर्जित संपत्तियों में बड़ा अंतर मिला। वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इन संपत्तियों को प्रथम दृष्टया नशा तस्करी से अर्जित आय से जुड़ा माना और एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत सीज कर दिया। इस साल 12 मामलों में 8 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति सीज शिमला पुलिस ने वर्ष 2026 में अब तक 12 एनडीपीएस मामलों में वित्तीय जांच की है। इन मामलों में 8 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की चल, अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं। खास बात यह है कि वर्ष 2025 और 2024 में शिमला पुलिस ने एनडीपीएस मामलों में इस तरह की कोई वित्तीय जांच नहीं की थी और न ही नशा तस्करी से अर्जित संपत्तियों को सीज करने की कार्रवाई हुई थी। पुलिस अब नशा तस्करों की गिरफ्तारी और मादक पदार्थों की बरामदगी तक कार्रवाई सीमित नहीं रख रही है, बल्कि नशे के कारोबार से अर्जित अवैध कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियों तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है।