Chandigarh Daily 27°C Clear AQI 101 Nifty 22,643.10 -0.47% Sensex 73,045.22 -0.75% Bank Nifty 54,094.50 +0.22% USD-INR 95.24 +0.14% Gold ₹/10g ₹123,874 -0.71% Silver ₹/kg ₹165,234 -1.01% Crude \$ 101.64 +1.74% India Women v Zimbabwe WomenISTLive

नंदनकानन पहुंचे ओडिशा के जंगल से मिले 5 बेबी ओरंगुटान:भारत में नहीं पाए जाते, इन्हें जिंदा रखना चुनौती; तस्करी करके लाने की आशंका

ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में मंगलवार सुबह मिले 5 नन्हे ओरंगुटान का रहस्य गहरा गया है। दरअसल ये भारत में नहीं पाए जाते हैं, इसलिए पूरी आशंका है कि इन्हें तस्करी कर यहां लाया गया है। फॉरेस्ट ऑफिसर प्रतीक प्रकाश इंदलकर के मुताबिक, पांचों को फिलहाल भुवनेश्वर के नंदनकानन जू में रखा गया है। 3 नर और 2 मादा बच्चे हैं। सभी की उम्र 6 महीने से 1 साल के बीच है। चार बच्चे स्वस्थ हैं। पांचवें पर नजर रखी जा रही है, दरअसल जंगल में मिले पांचवें ओरंगुटान में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए थे। क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद गोगिनेनी ने बताया कि बच्चों को पकड़ने के लिए तस्कर जंगल में इनकी मां को बेरहमी से मार देते हैं। मादा ओरंगुटान अपने बच्चे को 7-8 साल की उम्र तक नहीं छोड़ती। ऐसे में बगैर मां के इन पांचों बच्चों को ​जीवित रखना बड़ी चुनौती होगी। दावा- काली SUV में थे तस्कर, पकड़े जाने के डर से छोड़ गए इंदलकर के मुताबिक, ओरंगुटान दक्षिण-पूर्व एशिया (मलेशिया, इंडोनेशिया, बोर्नियो व सुमात्रा द्वीप) में पाए जाते हैं। भारत से इन द्वीपों को जोड़ने वाला कोई कॉरिडोर नहीं है। इसलिए इनका प्राकृतिक रूप से यहां पहुंचना असंभव है। ओडिशा तट तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता समुद्र ही है। बालासोर की सीमा पश्चिम बंगाल से लगती है। अंदेशा है कि अंतरराष्ट्रीय तस्कर इन्हें सड़क से ले जा रहे थे। चेकिंग या पकड़े जाने के डर से इन्हें छोड़कर भाग गए। पुलिस की एसटीएफ और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सोमवार रात जंगल के पास एक काली एसयूवी देखी गई थी। यह गाड़ी सीसीटीवी फुटेज में भी दिखाई दी थी। एसयूवी के मालिक का पता लगाया जा रहा है। रसूखदार ‘प्राइवेट जू’ या फार्महाउस में रखते हैं, इसलिए इनकी भारी मांग देश के बेहद अमीर लोग, बिजनेसमैन और रसूखदार हस्तियां स्टेटस सिंबल के लिए घरों में ‘प्राइवेट जू’ या फार्महाउस बनाते हैं। ओरंगुटान इंसानों की तरह व्यवहार करते हैं। बेहद समझदार होते हैं। इसलिए अमीर इन्हें अवैध रूप से रखने के लिए मोटी रकम देते हैं। इसके चलते इनकी तस्करी होती है। इन्हें म्यांमार के रास्ते पूर्वोत्तर भारत (मिजोरम या असम की अंतरराष्ट्रीय सीमा) से भी लाया जाता है। पूर्वोत्तर का यह कॉरिडोर दुर्लभ जीवों की तस्करी के लिए कुख्यात रूट है। 2022 में असम-मिजोरम की सीमा के पास दो ओरंगुटान मिले थे। इन्हें म्यांमार के रास्ते लाया गया था। तस्करी के पीछे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट गोगिनेनी के मुताबिक, यह काम बहुस्तरीय सिंडिकेट का है। इसमें स्थानीय शिकारी (इंडोनेशिया में), सीमा पार कराने वाले एजेंट (म्यांमार-भारत सीमा पर), फर्जी दस्तावेजों के सहारे देश के भीतर ट्रांसपोर्ट करने वाले कूरियर और अंत में बड़े डीलर शामिल होते हैं। यह सिंडिकेट पिरामिड की तरह काम करता है। शिकारी इंडोनेशिया (बोर्नियो/सुमात्रा) या मलेशिया के जंगलों से दुर्लभ जीव (कछुए, ओरंगउटान, कंगारू, मकाऊ पक्षी) पकड़ते हैं। म्यांमार, थाईलैंड या वियतनाम में बैठे इंटरनेशनल ब्रोकर इन्हें खरीदते हैं। फर्जी ब्रीडिंग या जाली दस्तावेज तैयार करवाते हैं। असम-मिजोरम बॉर्डर पार करने के बाद इन्हें सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के रास्ते भारत में प्रवेश कराया जाता है।