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पंजाब CM ऑफिस भ्रष्टाचार मामले में आज सुनवाई:CBI-ED करेगी जवाब पेश, DGP को 3 बार लेटर भेज चुकी ईडी; अकाली दल ने मांगा जवाब

पंजाब में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई होगी। गुरुवार को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से एक दिन का समय मांगा गया था। आज होने वाली सुनवाई में दोनों एजेंसियों की ओर से जवाब दाखिल किया जा सकता है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए सीबीआई को भी नोटिस जारी किया था। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया था कि ईडी ने पंजाब के डीजीपी को एक नहीं, बल्कि तीन बार पत्र भेजे थे। ये पत्र 24 जुलाई 2026, 30 जुलाई 2026 और 7 अगस्त 2026 को भेजे गए थे। केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया था कि इन पत्रों के माध्यम से ED ने कथित भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित जानकारी और साक्ष्य पंजाब पुलिस के साथ साझा किए थे। ED ने इन पत्रों के जरिए मामले में एफआईआर दर्ज करने और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने CBI को भी जारी किया नोटिस पिछली सुनवाई में पीआईएल नंबर 238/2026 पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले में CBI को भी पक्ष बनाते हुए नोटिस जारी किया था। अदालत ने संबंधित पक्षों से मामले को लेकर जवाब मांगा था। गुरुवार की सुनवाई में यह जवाब पेश नहीं हो सका। ED ने DGP को 3 बार भेजे थे पत्र पिछली सुनवाई में सामने आई जानकारी के मुताबिक, ED ने 24 जुलाई को पंजाब के DGP को पहला पत्र भेजा था। इसके बाद 30 जुलाई और 7 अगस्त को दो और पत्र भेजे गए। इन पत्रों में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित सामग्री और साक्ष्य साझा किए जाने की बात सामने आई थी। अदालत में यह सवाल भी उठा था कि यदि केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से पंजाब पुलिस को जानकारी और साक्ष्य उपलब्ध करवाए गए थे तो उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। अकाली दल ने CM से मांगा था जवाब मामला सामने आने के बाद शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की थी। पार्टी के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप कलेर ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री इन पत्रों को गलत बताते रहे हैं। अकाली दल का कहना था कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी इन आरोपों पर आपत्ति जताई गई थी और मानहानि का केस करने की बात कही गई थी। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की थी।