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लुधियाना की दरगाह पर प्रसाद में शराब:मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं भक्त, फिर लंगर लगता; मेले में सिर्फ एक दिन जा सकती हैं महिलाएं

लुधियाना में जगराओं के काउंके कला स्थित बाबा रोडे शाह की दरगाह से जुड़ी आस्था की एक अनोखी परंपरा है। यहां लोग मन्नत मांगने आते हैं और मन्नत पूरी होने पर सालाना मेले में शराब की बोतलें चढ़ाते हैं। मेले में चढ़ाई गई शराब को टब में डालकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इसके लिए अलग-अलग जगहों पर स्टॉल लगाए जाते हैं, जहां लोग लाइन में लगकर प्रसाद लेते हैं। यह परंपरा करीब 100 साल पुरानी बताई जाती है। मेले के एक दिन महिलाएं और बाकी दो दिन पुरुष श्रद्धालु आते हैं। इस बार वार्षिक मेला 5 से 7 सितंबर तक चला। इसमें आसपास के गांवों के अलावा दूर-दूर से लोग शराब की बोतलें और पेटियां लेकर पहुंचे। बताया जाता है कि शराब नहीं पीने वाले श्रद्धालु भी प्रसाद के तौर पर एक बूंद लेते हैं। खास बात यह है कि बाबा रोडे शाह खुद शराब नहीं पीते थे। जानिए सालाना मेले में क्या-क्या होता है… कैसे शुरू हुई शराब प्रसाद में बांटने की प्रथा स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा रोडे शाह जी कुछ समय यहां पर रहे। एक निसंतान दंपत्ति ने उनसे बच्चे की कामना की और उसके बाद उसका बच्चा हो गया। वो खुश होकर बाद में शराब की बोतल लेकर उनके पास पहुंचा। वो खुद शराब नहीं पीते थे और उन्होंने बोतल खोलकर लोगों को बांट दी। उसके बाद जो भी वहां आकर मन्नतें मांगता उसकी मन्नतें पूरी होती गई और लोग वहां शराब चढ़ाते रहे। इसके बाद यहां पर शराब चढ़ाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती गई और अब हजारों की तादात में लोग यहां पहुंचते हैं। मेले का एक दिन महिलाओं के नाम मेले में लोग शराब पीते हैं और नशा हो जाता है। ऐसे में व्यवस्था बनाने के लिए काफी साल पहले तय किया गया कि मेले के पहले दिन सिर्फ महिलाएं ही आएंगी। उस दिन महिलाएं व बच्चे आकर शराब की बोतलें चढ़ाकर चले जाएंगे। बाकी के दो दिन पुरुष आएंगे ताकि शराबी हालत में कोई किसी महिला का अपमान न करें। यह परंपरा अब भी मनाई जा रही है। हालांकि कुछ महिलाएं अपने परिवार के साथ तीनों दिन मेले में आती हैं। ************** ये खबर भी पढ़ें: नवरात्रि पर पंजाब में शराब का लंगर: दरबार के बाहर बेंच पर रखी बोतलें, प्रसाद के तौर पर बांटी, नवविवाहित जोड़े करते अरदास फरीदकोट में कोटकपूरा के गांव मरहाना में चैत्र नवरात्रि के दौरान एक अनोखी परंपरा देखने को मिली, जहां बाबा काला महर के यादगार मेले में शराब का लंगर लगाया गया। दरबार के बाहर बेंचों पर देसी और अंग्रेजी शराब की बोतलें सजाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में शराब परोसी गई। (पढ़ें पूरी खबर)