हिमाचल प्रदेश में एक से दो नए मंत्रियों की ताजपोशी हो सकती है। फिलहाल, कैबिनेट में मंत्री का एक पद खाली है। सियासी गलियारों में एक से दो सीनियर मंत्रियों के ड्रॉप होने की चर्चाएं है। आधी कैबिनेट को अचानक दिल्ली बुलाए जाने के बाद सियासी गलियारों में इस तरह की चर्चाएं ज्यादा हो रही है। सूत्र बताते हैं कि सीएम सुक्खू दो सीनियर मंत्रियों को ड्रॉप करना चाह रहे हैं। मगर इसके लिए हाईकमान की मंजूरी जरूरी है। इस पर सहमति बनाने के लिए ही हाईकमान ने हिमाचल कैबिनेट को दिल्ली बुलाया है। इनके साथ हाईकमान आज (बुधवार को) मीटिंग करेगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल मंत्रियों के साथ सामूहिक बैठक के अलावा वन-टू-वन भी बातचीत कर सकते हैं। इस दौरान मंत्रियों की अब तक परफॉर्मेंस को भी रिव्यू किया जाएगा। इसके आधार पर ड्रॉप करने का फैसला और पोर्टफोलियो में बदलाव होगा। ड्रॉप होने वाले मंत्री के स्थान पर नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ। संभव है कि दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। शांडिल और चंद्र कुमार को ड्रॉप करने की चर्चाएं कैबिनेट से जिन दो वरिष्ठ मंत्रियों को हटाए जाने की चर्चाएं है, उनमें स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और कृषि मंत्री चंद्र कुमार के नाम प्रमुख हैं। हालांकि, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। दोनों ही सरकार के वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय से कैबिनेट में हैं। इनमें धनीराम शांडिल एससी समुदाय और चंद्र कुमार ओबीसी समुदाय को रिप्रेजेंट करते हैं। इस वजह से पार्टी हाईकमान दोनों को हटाने का जोखिम नहीं ले पा रहा। ऐसा हुआ तो दोनों की सहमति से ही होगा। सहमति नहीं बनी तो मंत्रिमंडल में खाली पड़ा एक ही पद भरा जाएगा। शांडिल को लेकर सहमति बनने के संकेत सूत्रों की मानें तो धनीराम शांडिल को लेकर सहमति बनाने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। शांडिल को कैबिनेट से ड्रॉप करने की स्थिति में उन्हें राजनीतिक रूप से सम्मानजनक विकल्प देने पर भी विचार हो सकता है। चर्चा यह है कि उनके बेटे संजय शांडिल को किसी बोर्ड या निगम में जिम्मेदारी देकर परिवार को साथ रखने का प्रयास किया जा सकता है। चंद्र कुमार पर फैसला आसान नहीं दूसरी ओर कृषि मंत्री चंद्र कुमार को लेकर स्थिति कुछ अलग बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें कैबिनेट से हटाने को लेकर सहमति बनाना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। चंद्र कुमार सत्ता की चाबी तय करने वाले कांगड़ा जिले से आते हैं और वरिष्ठता के साथ साथ ओबीसी नेता है। हिमाचल की राजनीति में ओबीसी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखेगा हाईकमान लिहाजा कैबिनेट में फेरबदल के वक्त जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा, क्योंकि पूर्व में कैबिनेट गठन के दौरान क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया। शिमला संसदीय क्षेत्र से सुक्खू कैबिनेट में पांच मंत्री और शिमला जिला से तीन मंत्री बनाए गए। इसी तरह, हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से पहले सीएम व डिप्टी सीएम और बाद में बिलासपुर से राजेश धर्माणी को मंत्री बनाया गया। सबसे बड़े कांगड़ा जिला को केवल दो मंत्री दिए गए। वहीं राजस्व मंत्री जगत नेगी को यदि ट्राइबल कोटे से गिना जाए तो मंडी संसदीय क्षेत्र से एक भी मंत्री सुक्खू कैबिनेट में नहीं है। सुंदर की मजबूत दावेदारी की वजह मंडी संसदीय क्षेत्र से मंत्री नहीं होने की वजह से कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जी रही है। यदि कोई मंत्री ड्रॉप होता है तो उनके स्थान पर पालमपुर से आशीष बुटेल, ज्वालाजी से संजय रत्न में से किसी एक की ताजपोशी हो सकती है। चर्चा में अर्की के विधायक एवं सीएम के सबसे करीबी संजय अवस्थी का नाम भी है। मगर इनके मंत्री बनने में शिमला संसदीय क्षेत्र से पहले ही पांच मंत्री का होना बड़ी बाधा हो सकता है। नगर निगम चुनाव की वजह से बुटेल की दावेदारी मजबूत सुंदर सिंह ठाकुर के बाद आशीष बुटेल का नाम प्रमुख तौर पर लिया जा रहा है, क्योंकि तीन महीने पहले संपन्न राज्य के चार नगर निगम में तीन जगह सत्तारूढ़ कांग्रेस की करारी हार हुई है, जबकि आशीष बुटेल ने पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस को जिताया है। डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने भी बुटेल की इसी वजह से हाईकमान के पास पैरवी की है। फिलहाल यह अटकले है और इस तरह के कयास पिछले एक साल से लगाए जा रहे है। सीएम सुक्खू अनेको बार जल्द कैबिनेट गठन की बात कह चुके हैं। कई बार सीएम समेत मंत्रियों को पहले भी दिल्ली बुलाया जा चुका है। मगर हाईकमान और सीएम सुक्खू फैसला नहीं कर पा रहे, जबकि विधानसभा चुनाव के लिए अब लगभग 13 से 14 महीने का वक्त बचा है।
हिमाचल-कैबिनेट फेरबदल को लेकर दिल्ली में बड़ी मीटिंग:दो मंत्रियों को ड्रॉप करने की चर्चाएं; सुंदर और बुटेल का नाम नए मंत्री की रेस में