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हिमाचल शिक्षा बोर्ड का ₹100 करोड़ का भुगतान अटका:पेंशनरों का एरियर भी रुका; 154 स्कूल CBSE को देने से बोर्ड के भविष्य पर सवाल

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। शिक्षा विभाग से पाठ्यपुस्तकों की छपाई और सप्लाई के बदले करीब 100 करोड़ रुपए का भुगतान लंबे समय से रुका हुआ है। इस वजह से बोर्ड के रिटायर कर्मचारियों को मिलने वाला एरियर भी अटक गया है। पेंशनर्स का कहना है कि प्रदेश के दूसरे सरकारी विभागों में एरियर जारी हो चुका है, लेकिन बोर्ड के पेंशनर्स अभी भी इंतजार कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड पेंशनर्स कल्याण संघ की बैठक में इस स्थिति पर चिंता जताई गई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष सुरेंदर चौधरी ने की। संघ ने नाराजगी जताई कि सरकार की सूचना के बावजूद 70 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को एरियर नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से इसे तुरंत जारी करने की मांग की है। संघ ने कॉर्पस ट्रस्ट में अपने द्वारा नामित दो सदस्यों को शामिल करने की मांग भी दोहराई। पदाधिकारियों के अनुसार, प्रशासन की लिखित मंजूरी के बाद भी अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संघ का कहना है कि पेंशनर्स के हितों से जुड़े फैसलों में उनके प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। पेंडिंग भुगतान तुरंत जारी करने की मांग पेंशनर्स संघ ने सरकार से शिक्षा विभाग को निर्देश देने की मांग की है। उनका कहना है कि बोर्ड का रुका हुआ करीब 100 करोड़ रुपए का भुगतान तुरंत जारी करवाया जाए। संघ का मानना है कि यह राशि मिलने से बोर्ड की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और पेंशनर्स की लंबित देनदारियां चुकाई जा सकेंगी। स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने के फैसले पर भी चिंता जताई संघ अध्यक्ष सुरेंदर चौधरी और महासचिव कुलदीप वालिया ने प्रदेश के 154 स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने के फैसले पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार ने भविष्य में 100 और स्कूलों को सीबीएसई में शामिल करने की बात कही है। ऐसे में स्कूल शिक्षा बोर्ड के कामकाज और आय पर इसका असर पड़ने की आशंका है। 900 परिवारों के भविष्य पर सवाल पदाधिकारियों ने कहा कि इससे बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े करीब 900 परिवारों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। सरकार से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ बोर्ड के अस्तित्व और उससे जुड़े परिवारों के हितों को भी ध्यान में रखने की मांग की।