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गुरुग्राम के फायर ऑफिसर के खिलाफ जमानती वारंट:RTI एक्ट के उल्लंघन पर आयोग सख्त, ऊंची बिल्डिंगों की NOC की मांगी थी जानकारी

हरियाणा सूचना आयोग ने गुरुग्राम के सीनियर फायर ऑफिसर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई आरटीआई मामलों की सुनवाई में उनके बार-बार गैर-हाजिर रहने पर की गई है। आयोग ने इसे ‘आरटीआई एक्ट का जानबूझकर उल्लंघन’ माना है। मामला आरटीआई कार्यकर्ता हरिंद्र ढींगड़ा की एक याचिका से जुड़ा है। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत 16 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों को दी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के संबंध में जानकारी मांगी थी। हालांकि, सीनियर फायर ऑफिसर ने न तो जानकारी उपलब्ध कराई और न ही आयोग के समक्ष पेश हुए। अधिकारी के ढुलमुल रवैए पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग ने पुलिस कमिश्नर के माध्यम से जमानती वारंट तामील करने का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस को एक अक्टूबर को आयोग के सामने अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के सख्त कदम से सरकारी विभागों में आरटीआई को लेकर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों में हड़कंप है। आवेदनकर्ता द्वारा आरटीआई आवेदन में ये जानकारी मांगी थी नियम और कार्रवाई की प्रति: आवेदनकर्ता ने उन विशिष्ट कानूनों, नियमों, बाय-लॉज, सर्कुलर और विभागीय दिशा-निर्देशों की प्रमाणित प्रतियों की मांग की है, जो गुरुग्राम में फायर एनओसी की अनदेखी करने वालों पर लागू होते हैं। उन्होंने पूछा है कि यदि कोई बहुमंजिला इमारत या व्यावसायिक परिसर फायर विभाग या नगर निगम से अनिवार्य अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ दंड, जुर्माना या कानूनी अभियोजन का क्या प्रावधान है। वह इस लापरवाही पर प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के आधिकारिक कानूनी दस्तावेजों को प्राप्त करना चाहते थे। प्रमुख सरकारी परिसरों के नोटिस रिकॉर्ड: उन्होंने शहर के सबसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों और परिसरों के फायर सुरक्षा रिकॉर्ड मांगे थे। इनमें मिनी सचिवालय, सोहना चौक स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय, नगर निगम कार्यालय, हुडा प्रशासक कार्यालय, नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय, जिला कोर्ट परिसर, HSIIDC और कादरपुर स्थित सीआरपीएफ कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। उन्होंने इन वीआईपी इमारतों को हरियाणा फायर सर्विसेज एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत जारी किए गए सभी नोटिस, उनसे संबंधित फाइलें, नोट शीट, पांडुलिपियों, कार्यालय ज्ञापनों और उन पर विभाग द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई की पूरी कॉपियां मांगी थीं। आयोग ने लापरवाही और इन नियमों का उल्लंघन माना मांगी गई जानकारी नहीं दी: आरटीआई कानून के तहत आवेदनकर्ता हरिंद्र ढींगड़ा ने 16 मीटर से ऊंची इमारतों की फायर एनओसी और प्रमुख सरकारी कार्यालयों को जारी नोटिसों से जुड़े जो रिकॉर्ड मांगे थे, फायर ऑफिसर ने वे दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए। सुनवाई से बार-बार गायब रहे: जब जानकारी न मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग के पास पहुंचा, तो आयोग द्वारा समन भेजे जाने के बावजूद सीनियर फायर ऑफिसर आरटीआई मामलों की निर्धारित सुनवाइयों में बार-बार गैर-हाजिर रहे। आदेशों की अनदेखी की: उन्होंने आयोग के समक्ष न तो खुद को पेश किया और न ही कोई उचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। फायर ऑफिसर का पक्ष
इस बारे में सीनियर फायर ऑफिसर नरेंद्र यादव का कहना है कि यह काफी पुराना केस लग रहा है। अभी मेरे पास आयोग के आदेशों की कॉपी नहीं पहुंची है। कॉपी मिलने के बाद ही पता चल सकेगा कि मेरे कार्यकाल का मामला है या किसी और अधिकारी के समय का है।

Editorial Attribution: Originally reported by हरियाणा | दैनिक भास्कर. Curated and contextualized by the Chandigarh Daily news desk.