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गुरुग्राम में CCTV से होगी जलभराव की रियल टाइम मॉनिटरिंग:3 हजार नए कैमरे लगेंगे; कुछ ही मिनटों में पहुंचेंगी एक्शन टीमें

गुरुग्राम में मानसून में जलभराव से हुई इंटरनेशनल फजीहत के बाद महानगर विकास प्राधिकरण ने अब रियल टाइम मॉनिटरिंग और रिस्पांस टाइम कम करने के लिए शहर में 3087 नए सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला लिया है। इन कैमरों को हॉटस्पॉट, ड्रेनेज और जलभराव वाले प्वाइंट्स पर इंस्टॉल कर रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। जैसे ही कहीं पानी जमा होगा, कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलेगा और चंद मिनटों में एक्शन टीमें मौके पर पहुंचकर जल निकासी सुनिश्चित करेंगी। इतना ही नहीं सड़कों पर अवैध रूप से कचरा फेंकने वालों की भी इन कैमरों से पहचान कर सख्त एक्शन लिया जाएगा। जीएमडीएम के अधिकारियों ने इस हाईटेक निगरानी से मानसून में जलभराव से बड़ी राहत का दावा किया है। कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी मजबूत मॉनिटरिंग नेटवर्क तैयार करने के लिए दिसंबर 2026 तक पहले से लगे 1200 से बढ़ाकर सीसीटीवी कैमरों की संख्या 4,287 की जाएगी। जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा ने मंगलवार को स्मार्ट सिटी सीसीटीवी प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने जीएमडीए फेज-2 और मारुति सुजुकी के सहयोग से लगाए जा रहे कैमरों के प्रोजेक्ट में तेजी लाने तथा पूरे नेटवर्क को जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ने के निर्देश दिए। ड्रेनेज और जलभराव वाले स्थान भी कैमरे की नजर में CEO ने शहर के महत्वपूर्ण ड्रेनेज प्वाइंट, नालों, जलभराव वाले स्थानों, ड्रेनों के शुरुआती एवं संगम बिंदुओं तथा कूड़ा डंपिंग प्वाइंट पर भी सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। आईसीसीसी से इन स्थानों की रियल टाइम निगरानी होगी, जिससे समस्या सामने आते ही संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्रवाई कर सकेंगी। 23 प्रमुख जंक्शन होंगे कैमरों से लैस जीएमडीए और एमएसआईएल के बीच हुए एमओयू के तहत 23 प्रमुख जंक्शनों पर 365 सीसीटीवी कैमरे और 29 स्पीड रडार लगाए जा रहे हैं। एमएसआइएल अपने सीएसआर प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 69 और जंक्शनों पर 1000 सीसीटीवी कैमरे लगाएगा। संभावित क्षेत्रों में मानेसर, आईएमटी, सोहना रोड, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, सुशांत लोक, कन्हई और पालम विहार कॉरिडोर शामिल हैं। ऑटोमेटिक चालान से घटेगा मैनुअल हस्तक्षेप सीईओ ने कहा कि सीसीटीवी नेटवर्क का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं, बल्कि ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सड़क सुरक्षा बढ़ाना है। एएनपीआर, आरएलवीडी और स्पीड रडार के जरिए नियमों का उल्लंघन स्वतः चिन्हित कर ऑटोमेटिक चालान की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। इससे मैनुअल हस्तक्षेप कम होगा और यातायात व्यवस्था में अनुशासन आएगा। सड़कों से लेकर पॉश इलाकों तक भर जाता है पानी बता दें कि फॉर्च्यून 500 कंपनियों और वैश्विक कॉरपोरेट्स के हब के रूप में पहचान रखने वाला यह शहर मानसून में घुटनों तक पानी में डूब जाता है, जिससे नेशनल हाईवे से लेकर गोल्फ कोर्स रोड जैसे पॉश इलाकों तक में पानी भर जाता है। घंटों के जाम और बुनियादी ढांचे की इस बदहाली की तस्वीरें जब वैश्विक मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं, तो भारत के इस सबसे बड़े टेक और बिजनेस हब की साख को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और विदेशी कंपनियों के बीच भारी धक्का लगता है। जलभराव में फंसे थे स्कूली बच्चे, अभिभावकों में रोष हाल ही में हुई जोरदार बारिश के दौरान सुभाष चौक के पास भारी जलभराव के कारण स्कूली बच्चे कई घंटों तक बसों में ही कैद रहने को मजबूर हो गए थे। बारिश के बाद घुटनों तक भरे पानी और किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम ने गाड़ियों के पहिये पूरी तरह थाम दिए। दोपहर में छुट्टी के बाद घर लौट रहे मासूम बच्चे स्कूल बसों में भूखे-प्यासे फंसे रहे। जलभराव की इस भयावह स्थिति के चलते बसें रेंगती नजर आईं, जिससे अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गईं और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और रोष व्यक्त किया।