चंडीगढ़ में संपत्ति से जुड़ी सेवाओं के लिए अब लोगों को अलग से नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेने के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा। एस्टेट ऑफिस ने संपत्ति सेवाओं की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। इसके तहत लीज राइट्स के ट्रांसफर और लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में कन्वर्जन जैसी सेवाओं के लिए NDC की अलग प्रक्रिया खत्म कर दी गई है। अब आवेदक सीधे संबंधित मुख्य सेवा के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। संपत्ति पर किसी भी सरकारी बकाया की जांच इसी आवेदन के दौरान की जाएगी। पहले NDC के लिए अलग आवेदन करना पड़ता था और इसके बाद मुख्य सेवा के लिए दोबारा आवेदन करना होता था। इससे एक ही संपत्ति के दस्तावेजों की दो बार जांच होती थी और प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लगता था। एक आवेदन में होगी पूरी जांच नई SOP के तहत ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद रिकॉर्ड कीपर या डीलिंग असिस्टेंट संपत्ति के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करेंगे। इसके बाद अकाउंटेंट सरकारी बकाया और सेवा शुल्क की गणना करेगा। जरूरत पड़ने पर ऑडिट सेक्शन भी जांच करेगा। किसी कमी या बकाया की जानकारी अलग-अलग नोटिस के बजाय एक ही डिस्क्रेपेंसी मेमो-कम-डिमांड नोटिस में दी जाएगी। 15 कार्य दिवस में निपटारा एस्टेट ऑफिस के अनुसार, पूरा आवेदन मिलने के बाद मामले का निपटारा 15 कार्य दिवस में किया जाएगा। हालांकि, डिस्क्रेपेंसी मेमो-कम-डिमांड नोटिस जारी होने पर उसके अनुपालन में लगने वाला समय 15 कार्य दिवस की समय-सीमा में शामिल नहीं होगा। ऑनलाइन चेकलिस्ट में भी होगा बदलाव नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन सेवाओं की चेकलिस्ट में संशोधन कर NDC को अनिवार्य दस्तावेजों की सूची से हटाया जाएगा। संपत्ति पर बकाया सरकारी देनदारी का आकलन आवेदन प्रक्रिया के दौरान ही होगा। बकाया राशि जमा होने के बाद अंतिम मंजूरी दी जाएगी। नई व्यवस्था का मूल सिद्धांत ‘एक आवेदन-एक जांच-एक डिस्क्रेपेंसी/डिमांड नोटिस-एक अंतिम निपटारा’ रखा गया है। फिलहाल यह व्यवस्था दो प्रमुख सेवाओं पर लागू की जा रही है।
चंडीगढ़ में संपत्ति सेवाओं में अलग NDC की जरूरत नहीं:एस्टेट ऑफिस ने प्रक्रिया सरल बनाई, एक आवेदन में होगी बकाया और दस्तावेजों की जांच
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