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चंडीगढ़ PG अग्निकांड में कोठी मालिक-संचालक पर आरोप तय:6 साल बाद चलेगा मुकदमा, कमरों में फंसी थी छात्राएं; 3 की हुई थी मौत

चंडीगढ़ सेक्टर-32 के एक पीजी में साल 2020 में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में करीब 6 साल बाद मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है। जिला अदालत ने कोठी मालिक गौरव अनेजा और पीजी संचालक नितेश बंसल के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए के तहत आरोप तय कर दिए हैं। दोनों आरोपियों पर अब लापरवाही से मौत के मामले में मुकदमा चलेगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। इस अग्निकांड में 3 छात्राएं रीया, पाथी और मुस्कान की मौत हो गई थी। लंबे समय से कानूनी पेच और मामले में लगी रोक के कारण मुकदमे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब आरोप तय होने के बाद अदालत में नियमित सुनवाई शुरू होगी। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। धारा 304 के तहत केस दर्ज किया था हादसे के बाद पुलिस ने कोठी मालिक गौरव अनेजा और पीजी संचालक नितेश बंसल के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत केस दर्ज किया था। यह धारा गैर इरादतन हत्या से संबंधित है। दोनों आरोपियों ने पुलिस की कार्रवाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपियों का तर्क था कि इस मामले में गैर इरादतन हत्या की धारा नहीं बनती है। सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेजा उनका कहना था कि गलत धारा लगाकर मामले को गंभीर बनाया गया है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को राहत दी। अदालत ने धारा 304 हटाकर आईपीसी की धारा 304ए के तहत केस चलाने का निर्देश दिया। इसके बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेज दिया गया। सेशंस कोर्ट की बजाय अब मजिस्ट्रेट कोर्ट में चलेगा केस धारा 304 यानी गैर इरादतन हत्या के मामले की सुनवाई सेशंस कोर्ट में होती है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद धारा बदलकर 304ए किए जाने से अब इस मामले की सुनवाई मजिस्ट्रेट कोर्ट में होगी। धारा 304ए लापरवाही से मौत के मामले से संबंधित है, जिसमें अधिकतम दो साल तक की सजा का प्रावधान है। केस मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रांसफर किया गया हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रांसफर किया गया। अब अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं और नियमित सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है। यानी फरवरी 2020 में हुए इस हादसे के करीब छह साल बाद अब अदालत में गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अवैध तरीके से बने कमरों में फंसी थी छात्राएं फरवरी 2020 में सेक्टर-32 स्थित एक पीजी में आग लग गई थी। आरोप था कि पीजी में कई कमरे अवैध तरीके से बनाए गए थे। इनमें लकड़ी और फाइबर की दीवारें लगी हुई थीं। आग इतनी तेजी से फैली कि छात्राओं को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। हादसे के दौरान 3 छात्राएं रिया, पाक्षी और मुस्कान अपने कमरों से बाहर नहीं निकल सकीं। दम घुटने से तीनों की मौत हो गई थी। वहीं, दो अन्य छात्राएं इस हादसे में गंभीर रूप से झुलस गई थीं।