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जालंधर में मंडरा रहा ‘दिल्ली जैसा खतरा’: सौ से ज्यादा इमारतें असुरक्षित घोषित

जालंधर | दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुई इमारत दुर्घटना में हुई मौतों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल पंजाब के औद्योगिक शहर जालंधर पर उठ रहा है। क्या जालंधर नगर निगम भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? शहर के घने और पुराने व्यावसायिक व रिहायशी इलाकों में खड़ी दर्जनों खस्ताहाल इमारतें कभी भी जमींदोज हो सकती हैं। कई बिल्डिंगों में कॉमर्शियल दुकानें चल रही हैं जिसमें रोज सैकड़ों लोग आते हैं… निगम अधिकारियों को सुध लेने की जरूरत है। नगर निगम के आंकड़ों और सर्वे के अनुसार शहर में 100 से अधिक इमारतों को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। सबसे संवेदनशील इलाके: माईं हीरां गेट, शेखां बाजार, मिलाप चौक, अटारी बाजार, फगवाड़ा गेट और पुराना जेल रोड। स्थिति: इनमें से 60% से अधिक इमारतें व्यावसायिक (कमर्शियल) हैं, जहां रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है। नोटिस की सच्चाई: बिल्डिंग ब्रांच की ओर से हर साल मानसून से पहले भवन मालिकों को धारा 268/269 (पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट) के तहत नोटिस तो थमा दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी कार्रवाई शून्य रहती है। कार्रवाई में रोड़ा : कई पुरानी संपत्तियों में मालिक और किराएदारों के बीच कोर्ट केस चल रहे हैं, जिससे मरम्मत या डिमोलिशन रुका हुआ है। ऐसे मामलों में निगम अधिकारी भी कानूनी रूप से कार्रवाई नहीं कर पा रहे।