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पंजाब में बिजली संकट, 3 दिन बाद लगेंगे लंबे कट:AAP मंत्री बोले- कोयला नहीं आ रहा; केंद्र का जवाब- जरूरत का 117% कोयला स्टॉक

पंजाब में बिजली संकट गहराने लगा है। यहां के प्राइवेट थर्मल प्लांटों में सिर्फ 3 दिन का कोयला स्टॉक बचा है। अगर इस दौरान नई सप्लाई नहीं पहुंची तो इन प्लांटों में उत्पादन ठप हो सकता है। इससे पंजाब में बिजली की कमी बढ़ेगी और 3 दिन बाद लंबे बिजली कट लग सकते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने पंजाब में कोयले की कमी के दावे को खारिज किया है। कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पंजाब के थर्मल प्लांटों को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराया गया है। मंत्रालय के मुताबिक 4 सितंबर तक PSPCL के अपने थर्मल प्लांटों में कोयले का स्टॉक जरूरत से ज्यादा यानी 117% था। केंद्र ने बिजली संकट की वजह कोयले की कमी के बजाय प्लांटों के कम प्लांट लोड फैक्टर (PLF) यानी क्षमता से कम प्रोडक्शन को बताया है। यानी पंजाब सरकार और केंद्र के दावे बिल्कुल अलग हैं। पंजाब सरकार का कहना है कि केंद्र से कोयले की सप्लाई नहीं आ रही, जबकि केंद्र का दावा है कि पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराया गया है। पंजाब का दावा: प्राइवेट प्लांटों में 3 दिन का स्टॉक
पंजाब में बिजली की डिमांड करीब 15,900 मेगावाट पहुंच चुकी है। इसके मुकाबले राज्य में अपना उत्पादन सिर्फ 4,862 मेगावाट है। करीब 11,100 मेगावाट बिजली पावरकॉम को केंद्रीय पूल और बाहरी स्रोतों से खरीदनी पड़ रही है। पंजाब के पांच प्रमुख थर्मल प्लांटों की कुल स्थापित क्षमता 5,680 मेगावाट है, लेकिन मौजूदा संकट में करीब 3,800 मेगावाट ही उत्पादन हो पा रहा है। थर्मल प्लांटों को क्षमता के मुकाबले कम उत्पादन पर चलाना पड़ रहा है। प्राइवेट थर्मल प्लांटों में सिर्फ 3 दिन का कोयला बचा है, जबकि सरकारी थर्मल प्लांटों में 8 से 10 दिन का स्टॉक बताया जा रहा है। समय पर कोयले की रैक नहीं मिली तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। केंद्र का जवाब: PSPCL के प्लांटों में 117% स्टॉक
केंद्र के कोयला मंत्रालय ने पंजाब के इस दावे पर अलग आंकड़े दिए हैं। मंत्रालय के मुताबिक PSPCL के तीन थर्मल प्लांट- गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत, गोइंदवाल साहिब और रोपड़ की संयुक्त क्षमता 2,300 MW है। 4 सितंबर तक इन प्लांटों में कोयले का स्टॉक स्टेंडर्ड रिक्वायरमेंट का करीब 117% था। केंद्र के मुताबिक इसके बावजूद अगस्त में PSPCL प्लांटों का औसत PLF (प्लांट लोड फैक्टर) करीब 42% रहा। इसका मतलब ये कि प्लांट अपनी क्षमता के मुकाबले औसतन 42% पर चले। इसलिए इन प्लांटों में कम उत्पादन का कारण कोयले की कमी नहीं है। केंद्र ने कहा कि पंजाब में कैप्टिव खदान उत्पादन शुरू होने के बाद से PSPCL की पचवाड़ा सेंट्रल कोल माइन से पंजाब के प्राइवेट थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई को सुगम बनाया गया है। इनमें शामिल नाभा पावर लिमिटेड (NPL) और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) को पचवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के वार्षिक उत्पादन का 50% तक इस्तेमाल करने की अनुमति पहले से दी गई है। केंद्र का दावा- नाभा पावर ने 93% PLF पर किया उत्पादन
केंद्र ने कहा कि पंजाब स्थित नाभा पावर लिमिटेड ने अगस्त में करीब 93% PLF हासिल किया। मंत्रालय के मुताबिक इसे कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के स्रोतों से पर्याप्त कोयला सप्लाई मिली है। केंद्र के अनुसार CCL ने 30 मार्च 2026 को रेल कोल रैशनलाइजेशन (RCR) मोड के तहत NPL और TSPL को 5 लाख टन कोयले की पेशकश की थी। इसमें से करीब 4.1 लाख टन की बुकिंग हुई और 3.1 लाख टन की ढुलाई हो चुकी है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने NPL को 3.5 लाख टन कोयले की पेशकश की थी। इसमें से 1.3 लाख टन की बुकिंग और 0.98 लाख टन की ढुलाई हुई है। केंद्र का कहना है कि आईपीपी की ओर से कोयले की समय पर बुकिंग और निकासी भी जरूरी है। आज भी दो यूनिट बंद
इसी बीच पंजाब में दो दिन पहले सरकारी थर्मल प्लांटों के 8 में से 6 यूनिट बंद थे। आज लहरा मोहब्बत का एक यूनिट और रोपड़ का यूनिट नंबर-6 बंद है। तलवंडी साबो में दूसरे प्लांटों के मुकाबले जनरेशन ठीक है, जबकि बाकी थर्मल प्लांटों में क्षमता के मुकाबले करीब आधा उत्पादन हो रहा है। दिन में सोलर से कुछ राहत मिलती है, लेकिन शाम को सूरज ढलने के बाद सोलर उत्पादन शून्य हो जाता है। ऐसे में शाम के पीक आवर्स में थर्मल जनरेशन कम होने से ग्रिड पर दबाव बढ़ जाता है। अगर अगले 3 दिन में प्राइवेट थर्मल प्लांटों को समय पर कोयला नहीं मिला तो उनकी जनरेशन प्रभावित होगी। पंजाब का अपना उत्पादन और घट सकता है और बिजली कट बढ़ने की स्थिति बन सकती है।