फरीदाबाद में बिना नक्शे और नियमों को ताक पर रखकर बन रही इमारतों पर कार्रवाई को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। करीब तीन महीने पहले चारों जोन में अवैध और बिना नक्शे के बने भवनों की पहचान के लिए दिए गए निर्देशों के बावजूद निगम अब तक शहर में ऐसे भवनों की पूरी सूची तैयार नहीं कर पाया है। सर्वे में भवनों की संख्या के साथ यह भी जानकारी जुटानी थी कि इनमें कितने रिहायशी और कितने व्यावसायिक हैं। साथ ही भवनों में सुरक्षा इंतजाम, स्थान और सड़क की चौड़ाई का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाना था। नगर निगम के चार जोन में से अब तक सिर्फ एनआइटी जोन में 22 भवनों की पहचान हो पाई है। निगम अधिकारियों के अनुसार यह संख्या वास्तविक स्थिति की तुलना में काफी कम मानी जा रही है, क्योंकि एनआइटी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे मकान और इमारतें हैं, जिनका निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना किया गया है। हादसों के बाद कार्रवाई के आदेश जून में लखनऊ में बिना नक्शे के बने भवन में आग लगने की घटना के बाद नगर निगम ने भी अपने स्तर पर ऐसे भवनों का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। तत्कालीन निगम कमिश्नर धीरेन्द्र कुमार ने चारों जोन के संयुक्त आयुक्तों को अपने-अपने क्षेत्र में सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तीन महीने में सर्वे का काम पूरा नहीं हो सका। इससे पहले दिल्ली में कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने की घटना के बाद भी नगर निगम ने शहर में सर्वे कराया था। उस दौरान फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में 10 कोचिंग संस्थानों को सील किया गया था। हालांकि, बिना नक्शे के बने अन्य भवनों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई नहीं हो सकी। 4 मंजिला इमारतों पर भी कार्रवाई सीमित शहर में चार मंजिला भवनों के निर्माण का मामला भी लगातार उठता रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद चार मंजिला भवनों के निर्माण पर रोक है, इसके बावजूद कई क्षेत्रों में ऐसे निर्माण जारी रहने के आरोप लगते रहे हैं। ग्रीवेंस कमेटी की बैठकों में भी यह मुद्दा उठ चुका है। स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष मामला पहुंचने के बाद बिना पार्किंग बनाए जा रहे 4 मंजिला भवनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद बड़खल जोन में पिछले छह महीने के दौरान केवल 12 चार मंजिला भवनों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई हो सकी। इससे सवाल उठ रहा है कि जब अवैध निर्माणों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो निगम की निगरानी और कार्रवाई व्यवस्था इतनी धीमी क्यों है। निर्माणाधीन इमारतों के हादसे बढ़ा रहे चिंता शहर में नियमों की अनदेखी कर निर्माण किए जाने के दौरान हादसे भी सामने आते रहे हैं। सेक्टर-88 में निर्माणाधीन स्कूल की इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हुई थी और तीन लोग घायल हुए थे। सरूरपुर औद्योगिक क्षेत्र में निर्माणाधीन इमारत गिरने से भी दो लोगों की जान चली गई थी। वहीं मुजेसर गांव के रिहायशी इलाके में चल रही कंपनी में आग लगने से तीन लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं के बावजूद बिना नक्शे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बनाए जा रहे भवनों की पहचान और कार्रवाई का काम धीमी गति से चल रहा है। कमिश्नर बोले- दोनों शाखाओं से लेंगे रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह ने कहा कि निगम में पदभार संभालने के बाद कूड़ा व्यवस्था सुधारने को प्राथमिकता दी गई है। बिना नक्शे के निर्माण को लेकर प्लानिंग और तोड़फोड़ शाखा दोनों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। रिपोर्ट मिलने के बाद सामने आने वाली स्थिति के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
फरीदाबाद के 4 जोन में सिर्फ 22 भवन चिन्हित:3 महीने में निगम का सर्वे अधूरा, बिना नक्शे के बन रही इमारतें
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