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सिरसा का जवान जम्मू-कश्मीर में शहीद:राजौरी में ड्यूटी पर तैनात थे, आज पैतृक गांव में राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार, भीड़ जुटना शुरू

सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ के रहने वाले जवान सुखचैन सिंह जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए हैं। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका पार्थिव शरीर आज शुक्रवार को उनके पैतृक गांव कुत्ताबढ़ पहुंचेगा, जहां दोपहर करीब 12 बजे तक राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, सुखचैन सिंह जम्मू-कश्मीर के राजौरी में ड्यूटी पर थे, जब वे शहीद हुए। उनका पार्थिव शरीर राजौरी से सिरसा लाया जाएगा। फिर वहां से उनके गांव कुत्ताबढ़ ले जाया जाएगा। इस बारे में सैनिक बोर्ड भवन में अधिकारियों से बातचीत की तो उन्होंने बताया, एक जवान के शहीद होने की सूचना मिली है। गांव के सरपंच बेअंत सिंह ने बताया, इस दु:ख की घड़ी में पूरा गांव शहीद के परिवार के साथ है। उनकी ओर से पूरी तैयारियां है। शहीद के गांव में तैयारी से जुड़े फोटोज: 10 दिन बाद बेटे के जन्मदिन पर आने की बात कही थी सुखचैन ने : भाई सरबजीत शहीद सुखचैन के छोटे भाई सरबजीत सिंह ने दैनिक भास्कर की टीम से बातचीत के दौरान बताया कि करीब दो महीने पहले छुट्टी पर सुखचैन घर आए थे। कल वीरवर सुबह ही करीब आठ बजे के आसपास मेरी बड़े भाई सुखचैन से बातचीत भी हुई थी और उस समय कहा था कि मैं बिल्कुल ठीक हूं और मैं दस दिन बाद घर छुट्टी लेकर जरूर आऊंगा। अधिकारी ने फोन पर बताया, सुखचैन अमर हो चुका है सरबजीत बोले, दस दिन बाद सुखचैन के बेटे आकाशदीप का जन्मदिन है और इसी वजह से घर आने की बात कही थी। वीरवार को एक बजे के आसपास सुखचैन सिंह के शहीद होने का पता चला है।हम लोग तो कल अपने रिश्तेदारी में किसी मरगत में गए हुए थे और वहीं पर मेरे पास राजौरी से किसी अधिकारी का फोन आया और उन्होंने बताया कि सुखचैन अमर हो चुका है। शहीद के बारे में जानिए… 2015 में सेना में भर्ती हुए थे शहीद सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे। उनकी उम्र करीब 30 साल थी। वे ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के गांव कुत्ताबढ़ के रहने वाले थे। हाल ही में वे 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट राजौरी, कश्मीर में तैनात थे। सुखचैन सिंह का 5 साल का बेटा शहीद सुखचैन सिंह के परिवार में उनकी पत्नी निर्मल कौर और 5 साल का बेटा है। उनकी शादी 6 साल पहले हुई थी। सुखचैन सिंह के पिता बलविंदर सिंह का पहले ही देहांत हो चुका था। उनकी माता का नाम अमर कौर है। बड़े भाई का शैटरिंग का काम शहीद सुखचैन सिंह कंबोज समाज से थे। उनके 2 भाई और एक बहन है। तीनों भाई-बहन शादीशुदा हैं। उनके बड़े भाई गांव में शैटरिंग का काम करते हैं। सुखचैन सिंह का परिवार और उनके बड़े भाई का परिवार पिछले काफी समय से गांव कुत्ताबढ़ में ही रह रहे हैं।