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हिमाचल की यूनिवर्सिटी में भर्तियों का तरीका बदलेगा:HPPSC करेगा रिक्रूटमेंट; चर्चा के बाद पारित होगा विधेयक, अतिक्रमणकारी परिवार की बहू चुनाव नहीं लड़ पाएगी

हिमाचल प्रदेश विधानसभा मानसून सेशन के नौवे दिन आज (बुधवार) तीन महत्वपूर्ण विधेयक चर्चा के बाद पारित होंगे। इनमें सबसे प्रमुख राज्य की छह सरकारी यूनिवर्सिटी में भर्ती से जुड़ा विधेयक है। कांग्रेस सरकार ने बीते मंगलवार को सदन में ‘हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया। इसमें सभी सरकारी यूनिवर्सिटी में टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्तियां पब्लिक सर्विस कमीशन (HPPSC)और राज्य चयन आयोग के माध्यम से करने की तैयारी है। राज्य में ऐसा पहली बार होने जा रहा है। इस विधेयक को पारित करने के बाद राज्यपाल की मंजूरी को भेजा जाएगा। अब तक यूनिवर्सिटी प्रबंधन अपने स्तर पर भर्तियां करते थे। इससे पारदर्शिता का अभाव रहता था। इसी वजह से यूनिवर्सिटी में भर्तियों का मामले कई बार कोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने भी कई बार सख्त टिप्पणी की। ऐसे में सुक्खू सरकार ने यूनिवर्सिटी में भाई-भतीजावाद खत्म करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। संशोधन विधेयक के मुताबिक- राज्य की सभी छह यूनिवर्सिटी में टीचरों की नियुक्तियां करने का जिम्मा पब्लिक सर्विस कमीशन को सौंपा जाएगा, जबकि नॉन टीचिंग की भर्ती राज्य चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी। इस संशोधन के बाद यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव आएगा। इससे बेरोजगारों को योग्यता के आधार पर नौकरी के अवसल मिल सकेंगे। भर्तियां यूजीसी के निर्धारित मापदंडों के मुताबिक होगी। संस्थागत शासन में सुधार होगा संशोधन विधेयक के उद्देश्यों में स्पष्ट किया गया कि सरकार के संज्ञान में वित्तीय कुप्रबंधन और वित्तीय अनुशासन के अभाव के कुछ मामले आए थे। इसलिए यह बदलाव किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ऑटोनोमस बॉडी होती है, लेकिन इन संस्थानों को अनुदान राज्य सरकार देती है। पब्लिक फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अंतिम मुहर सरकार की सभी राज्य यूनिवर्सिटी की वित्त समिति की अध्यक्षता कुलपति के बजाय अब सीधे सरकार के वित्त सचिव द्वारा की जाएगी। नए पदों का सृजन करना हो, पदों को भरना हो या वेतन और भत्तों में संशोधन करना हो, ऐसे सभी वित्तीय मामले पहले वित्त समिति के समक्ष रखे जाएंगे। वित्त समिति द्वारा की गई सिफारिशों पर विश्वविद्यालयों की कार्यकारी परिषद या बोर्ड विचार करेगा और उसके बाद उन्हें अंतिम विचार एवं अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। अतिक्रमणकारी परिवार की परिभाषा में बहू भी सदन में आज हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 भी चर्चा के बाद पारित होगा। इसके जरिए पंचायती राज एक्ट में परिवार की परिभाषा को बदला जा रहा है, क्योंकि अभी तक के प्रावधान के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है तो उसका बेटा पंचायत व नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ सकता, जबकि उसकी बहू चुनाव लड़ सकती है। अब ऐसा नहीं होगा। अतिक्रमण करने वाले परिवार की बहू भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाएगी। प्रश्नकाल से शुरू होगी सदन की कार्यवाही इससे पहले सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी। सदन में पहला सवाल बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा और विपिन सिंह परमार का गूंजेगा। दोनों ने राज्य चयन आयोग के माध्यम से अब तक विज्ञापित पदों, भर्तियों और परीक्षा केंद्रों से जुड़ी जानकारी मांग रखी है। बड़सर से बीजेपी विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने भी बीते तीन साल के दौरान सरकार द्वारा अब तक किए गए उद्घाटन और शिलान्यास की जानकारी मांग रखी है।