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हिमाचल- सूचना आयोग में खाली पदों पर हाईकोर्ट सख्त:सीआईसी-आईसी के पद 15 महीने से खाली; सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नियुक्ति नहीं

हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार-चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्तियां करने को कहा है। चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की बैंच अब इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर को करेगी। दरअसल, हाईकोर्ट ने एक प्रतिवेदन के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। अदालत को बताया गया कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) का पद जून 2025 से और राज्य सूचना आयुक्त (आईसी) का पद जुलाई 2025 से खाली है। इन पदों के खाली होने से राज्य सूचना आयोग में आरटीआई से जुड़ी अपीलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को हिमाचल सरकार को राज्य सूचना आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने चयन प्रक्रिया का परिणाम अधिसूचित करने और नियुक्तियां करने के लिए समयसीमा भी तय की थी। हाईकोर्ट ने गौर किया कि सुप्रीम कोर्ट की तय समयसीमा बीतने के बावजूद नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए। दूसरे मामले में भी हाईकोर्ट ने जताई चिंता राज्य सूचना आयोग में रिक्त पदों को लेकर हाईकोर्ट में एक अलग याचिका भी चल रही है। इस मामले में एकल बैंच ने आयोग में सीआईसी और अन्य सदस्यों के पद खाली होने से आरटीआई व्यवस्था पर पड़ रहे असर को गंभीरता से लिया है। जस्टिस संदीप शर्मा ने कुलदीप महरोल की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि आयोग के रिक्त पदों को कब तक भरा जाएगा। सरकार को 14 सितंबर 2026 या उससे पहले अदालत को इस संबंध में स्पष्ट समयसीमा बताने के निर्देश दिए गए हैं। आरटीआई आवेदकों को हो रही परेशानी याचिका में कहा गया है कि राज्य सूचना आयोग के प्रभावी रूप से काम नहीं करने के कारण आरटीआई आवेदकों को परेशानी हो रही है। सरकारी विभागों के जन सूचना अधिकारियों के आदेशों के खिलाफ दूसरी अपील के लिए राज्य स्तर पर सूचना आयोग ही संबंधित वैधानिक मंच है। अदालत ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य सूचना आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है। आयुक्तों के पद खाली रहने से नागरिकों के आरटीआई से जुड़े वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। कोर्ट ने सरकारी वकील को इस मामले को मुख्य सचिव के समक्ष उठाने के निर्देश भी दिए हैं।