यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज पर मंगलवार शाम हुए सेना की वन पैरा स्पेशल फोर्स के हादसे में लापता दो जवानों में से एक का शव 24 घंटे से अधिक समय बाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बडथा गांव के पास यमुना नदी में मिला। बैराज से करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर मिले शव की सूचना के बाद सेना की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की। दूसरे लापता जवान की तलाश अभी जारी है। हादसे के बाद से सेना, हरियाणा और उत्तर प्रदेश एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस-प्रशासन और गोताखोर लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। खास बात यह रही कि करीब 24 घंटे तक सर्च टीमों का मुख्य फोकस पश्चिमी यमुना नहर और उससे आगे निकलने वाली नहरों पर रहा, लेकिन जवान के शव के यमुना नदी के रास्ते यूपी तक पहुंचने की संभावना सामने आने के बाद सर्च ऑपरेशन की दिशा भी बदल गई। चार बार बदली सर्च ऑपरेशन की रणनीति मंगलवार शाम करीब पांच बजे हादसा होने के बाद जवानों की तलाश के लिए सेना और बचाव टीमों ने लगातार रणनीति बदली। हादसे के तुरंत बाद सबसे पहले हथिनीकुंड बैराज के गेट के आसपास सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान उस मोटर बोट को पानी से बाहर निकाल लिया गया, जिसमें जवान अभ्यास कर रहे थे, लेकिन दोनों लापता जवानों का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद दूसरी रणनीति के अनुसार मंगलवार रात हरियाणा और उत्तर प्रदेश एसडीआरएफ की टीमें तथा स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे। तेज बहाव और अंधेरे के बीच नहर के किनारों तथा आसपास के हिस्सों में जवानों की तलाश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। तीसरी रणनीति ने सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ाते हुए उसी रात भारतीय वायुसेना की मदद ली गई। दो हेलिकॉप्टरों ने आसमान से बड़ी लाइटों के जरिए नहर में जवानों की तलाश की। हेलिकॉप्टर लगातार करीब पांच-पांच मिनट के अंतराल में नहर के ऊपर से गुजरते रहे, लेकिन अंधेरे और पानी की स्थिति के कारण इस रणनीति से भी कोई सुराग नहीं मिला। पानी बंद कर 30 जवानों ने बनाई मानव श्रृंखला बुधवार को सुबह सर्च ऑपरेशन का दायरा और बढ़ाकर हथिनीकुंड बैराज से दादूपुर तक करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में कर दिया गया। इसके बाद चौथी रणनीति के तहत पश्चिमी यमुना नहर में पानी का प्रवाह करीब 40 मिनट के लिए रोककर जलस्तर कम कराया गया। पानी कम होते ही सेना, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोर नहर में उतर गए। करीब 30 लोगों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई और नहर के सूखे हिस्से में चप्पा-चप्पा खंगाला। ऊपर से हेलिकॉप्टर और ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी गई। कम समय में सर्च पूरा करने का दबाव था, क्योंकि नहर में केवल करीब 40 मिनट तक ही पानी रोका गया था। इसके बाद दोबारा नहर में पानी छोड़ दिया गया। हालांकि इस अभियान में भी लापता जवानों का पता नहीं चला। बुधवार शाम नहर की सिल्ट निकालने के लिए बनाए गए हिस्से से दो लाइफ जैकेट और एक डाइविंग किट बरामद हुई। इससे आशंका जताई गई कि जवानों से संबंधित सामान पानी के बहाव के साथ दूसरी दिशा में भी जा सकता है। रात में यूपी के बडथा गांव में मिला शव बुधवार रात अचानक सर्च ऑपरेशन को बड़ी सफलता मिली, जब हथिनीकुंड बैराज से करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर क्षेत्र के बडथा गांव के पास यमुना नदी किनारे एक जवान का शव मिला। हालांकि शव के यूपी पहुंचने की उम्मीद इतनी ज्यादा नहीं थी, लेकिन प्रशासन द्वारा फिर भी नहर के साथ लगे गांव में अर्ल्ट किया हुआ था। शव मिलने की सूचना के बाद सेना की टीम मौके पर पहुंची और उसे अपने कब्जे में ले लिया। शव दोनों में से किस जवान का है यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। शव का यमुना के बहाव के साथ यूपी तक पहुंचना सर्च टीमों के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है, क्योंकि हादसे के बाद मुख्य रूप से पश्चिमी यमुना नहर और उससे जुड़ी धाराओं में ही तलाश की जा रही थी। अब दक्षिण यमुना नहर की ओर भी नजर एक जवान का शव मिलने के बाद अब दूसरे लापता जवान की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन और तेज किया जाएगा। प्रशासन ने पश्चिमी यमुना नहर के किनारे करनाल तक पड़ने वाले सभी हेड और गांवों को अलर्ट किया हुआ है। ग्रामीणों और संबंधित गांवों के सरपंचों को नहर पर नजर रखने तथा किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति के दिखाई देने पर तुरंत पुलिस-प्रशासन को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अब उत्तर प्रदेश की तरफ जाने वाली दक्षिण यमुना नहर में भी सर्च ऑपरेशन चलाए जाने की संभावना है। बचाव टीमों का फोकस उन सभी संभावित रास्तों पर रहेगा, जहां तेज बहाव के कारण जवान बहकर पहुंच सकते हैं। ऐसे हुआ था हादसा हादसा मंगलवार शाम करीब पांच बजे कलेसर से नीचे और हथिनीकुंड बैराज से कुछ पहले यमुना की अपस्ट्रीम में हुआ था। यहां 30 अगस्त से वन पैरा स्पेशल फोर्स का बाढ़ बचाव अभ्यास चल रहा था और मंगलवार को अभ्यास का अंतिम दिन था। अभ्यास के दौरान चिनूक हेलिकॉप्टर से पांच जवान यमुना में खड़ी मोटर बोट में कूदे। जवानों के बोट में पहुंचने के बाद मोटर बोट स्टार्ट नहीं हुई और अचानक डूबने लगी। इसके बाद पांचों जवान डाइविंग किट और लाइफ जैकेट के साथ तेज बहाव वाले गहरे पानी में उतर गए। महाराष्ट्र और जम्मू के रहने वाले हैं सैनिक इनमें से तीन जवान करीब 600 मीटर तैरकर पश्चिमी यमुना नहर के गेट की तरफ पहुंचे और बाहर निकलने में सफल रहे। जबकि महाराष्ट्र के आर्यन पाटिल और जम्मू-कश्मीर के अखनूर निवासी अजय लापता हो गए। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार शाम जारी प्रेस रिलीज में बताया था कि दोनों जवानों की तलाश के लिए सेना, वायुसेना, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। अब एक जवान का शव मिलने के बाद दूसरे जवान को तलाशने के लिए सर्च ऑपरेशन का दायरा और बढ़ाए जाने की तैयारी है।
24 घंटे बाद यूपी में मिला लापता सैनिक का शव:दूसरे की तलाश जारी, हथिनीकुंड बैराज हादसा: चार रणनीतियां बदलीं, नहीं लाग सुराग