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पंजाब में स्कूल-कॉलेज की बसें बंद:बठिंडा में हुई महापंचायत; ऑपरेटरों ने अनदेखी का आरोप लगाया, बोले- हमारे लिए अलग ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बने

पंजाब में आज स्कूलों और कॉलेजों की बसें व वैन बंद रहीं। सरकार के विरोध में निजी स्कूलों और कॉलेजों के बस ऑपरेटरों ने बठिंडा में राज्य स्तरीय महापंचायत आयोजित की। इसमें पंजाब के सभी जिलों से ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक शामिल हुए। ऑपरेटरों का कहना है कि पिछली और मौजूदा सरकारें लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही हैं। उनकी कोई भी मांग पूरी नहीं की जा रही है और सड़कों पर भी उन्हें परेशान किया जाता है। बठिंडा की अनाज मंडी में राज्य स्तरीय महापंचायत आयोजित पंजाब स्कूल और कॉलेज प्राइवेट बस ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सरन ने बताया कि बठिंडा की अनाज मंडी में राज्य स्तरीय महापंचायत आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही हैं। किसी भी ट्रांसपोर्ट अधिकारी या मंत्री की ओर से उन्हें मिलने का समय नहीं दिया जा रहा। ड्राइवर और कंडक्टर भी इसी व्यवस्था पर निर्भर सरन ने कहा कि बस ऑपरेटरों से लाखों परिवार जुड़े हुए हैं, क्योंकि वे बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने का काम करते हैं। अभिभावक उन पर भरोसा करते हैं। इसके अलावा हजारों ड्राइवर और कंडक्टर भी इसी व्यवस्था पर निर्भर हैं। बड़ी बसों के लिए लागू ट्रांसपोर्ट पॉलिसी ही स्कूल बसों पर भी लागू की जा रही है। 50 किलोमीटर के दायरे में चलती हैं स्कूल बसें स्कूल बसें आमतौर पर करीब 50 किलोमीटर के दायरे में चलती हैं। वहीं अन्य बसें 500 किलोमीटर तक का सफर करती हैं। उन्होंने छोटे स्तर के ट्रांसपोर्टरों के लिए अलग पॉलिसी बनाने की मांग की। उनका कहना है कि स्कूल बस ऑपरेटरों का सीधा संबंध बच्चों को स्कूल पहुंचाने से है, आम जनता को परिवहन सुविधा देने से नहीं। ये है ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें ऑपरेटरों की प्रमुख मांगों में ट्रांसपोर्ट पॉलिसी में बदलाव, सड़कों और आरटीओ स्तर पर कथित उत्पीड़न बंद करना, भारी टैक्स कम करना, बसों की उम्र सीमा 15 साल से बढ़ाकर 25 साल करना और टैक्स में छूट देना शामिल है। सरन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में संघर्ष को जिला स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने सरकार से बातचीत कर मांगों का समाधान करने की अपील की।