आईआईटी मंडी परिसर में जन्माष्टमी के दौरान जातिगत टिप्पणी वाले पोस्टर के विवाद में संस्थान प्रबंधन ने पल्ला झाड़ लिया है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम छात्रों की ओर से आयोजित किया गया था। संस्थान के डायरेक्टर प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि पोस्टर छात्रों के कार्यक्रम का हिस्सा था। हालांकि, आईआईटी प्रबंधन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच कमेटी में फैकल्टी सदस्यों के अलावा अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधि, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। अब समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं, एसएफआई की राज्य कमेटी ने मंडी आईआईटी में जन्माष्टमी के दिन हुए धार्मिक कार्यक्रम पर सवाल उठाए हैं। एसएफआई ने प्रदेश सरकार से कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कार्रवाई नहीं होने पर संगठन ने पूरे प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी है। एसएफआई ने नई शिक्षा नीति के जरिए मनुस्मृति थोपने का भी आरोप लगाया है। कैसे हुआ विवाद विस्तार से पढ़िए… तीन गुणों और उनसे जुड़े कामों के आधार पर बताया पोस्टर में भगवद्गीता का एक श्लोक भी दिखाया गया था, जिसमें चार सामाजिक वर्गों को प्रकृति के तीन गुणों और उनसे जुड़े कामों के आधार पर बताया गया है।
IIT मंडी पोस्टर विवाद में संस्थान ने झाला पल्ला:छात्रों पर फोड़ा ठीकरा; जांच बिठाई, एसएफआई ने आंदोलन की चेतावनी दी
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