भास्कर न्यूज़ | लुधियाना सिद्ध पीठ महाबली संकटमोचन श्री हनुमान मंदिर, हैबोवाल कलां में श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत आयोजित आठ दिवसीय श्रीकृष्ण कथा का समापन श्रद्धा-भक्ति के साथ हुआ। मंदिर प्रांगण के पंडाल में 1 सितंबर से 8 सितंबर तक चली कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और श्रीमद्भागवत के संदेशों का श्रवण किया। आयोजन मंदिर प्रधान अमन जैन, चेयरमैन ऋषि जैन और उपप्रधान अनुज मदान की अध्यक्षता में किया गया। हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) स्थित सिंदूरी माता मंदिर से पधारे कथा व्यास स्वामी प्रफुल ने आठ दिनों तक कथा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है। अंतिम दिन रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन हुआ, जिसमें उन्होंने इसे जीवात्मा-परमात्मा के मिलन, विश्वास और समर्पण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी विवाह प्रसंग मानव जीवन में प्रेम के साथ-साथ त्याग, विश्वास, निष्ठा और समर्पण का संदेश देता है। मनुष्य को अपने जीवन में अहंकार, मोह और नकारात्मकता का त्याग कर सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। यही इस प्रसंग की प्रमुख शिक्षा है। कथा विश्राम के बाद प्रातः मंदिर परिसर में हवन यज्ञ कराया गया। इस अवसर पर अनुज मदान और अमन जैन ने श्रद्धालुओं का आभार जताया तथा सनातन संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
रुक्मिणी विवाह प्रसंग जीवात्मा का परमात्मा के मिलन विश्वास और समर्पण का प्रतीक : स्वामी प्रफुल महाराज
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