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25 दिन वेटिंग : ड्राइविंग टेस्ट से पहले सब्र का इम्तिहान

भास्कर न्यूज | जालंधर सरकार भले ही परिवहन विभाग की सेवाओं को ऑनलाइन और ई-गवर्नेंस के जरिए आसान बनाने पर जोर दे रही है, लेकिन जालंधर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। जालंधर में नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 25 दिन की वेटिंग चल रही है। बुधवार को ड्राइविंग टेस्ट देने पहुंचे लोगों की लंबी लाइनें ट्रैक के बाहर तक पहुंच गईं। टेस्ट के लिए निर्धारित स्लॉट होने के बावजूद लोगों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ा। सबसे बड़ी समस्या ट्रैक पर परमानेंट असिस्टेंट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (एटीओ) नहीं होने से सामने आ रही है। पिछले सप्ताह एसटीसी की तरफ से होशियारपुर के असिस्टेंट एटीओ को दो दिन के लिए जालंधर का अतिरिक्त पदभार दिया गया था। लंबे समय बाद टेस्ट होने से लोगों की लंबी लाइनें लग गईं। (इनसेट) कार चालक अंदर तो थे ही बाहर मेन रोड पर भी लाइनें लग गई। -दीपक हड़ताल का भी असर लोगों के मुताबिक सिर्फ ड्राइविंग टेस्ट ही नहीं, बल्कि अप्रूवल, अपॉइंटमेंट रिशेड्यूल करवाने और इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की अप्रूवल जैसे कामों के लिए भी कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद जब किसी आवेदन में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है तो लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। पंजाब में मुलाजिमों की चल रही हड़ताल का असर ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सेवाओं पर भी पड़ रहा है। विभाग में पेंडेंसी हजारों में पहुंच चुकी है। ‘जुगाड़’ लगा रहे एप्लीकेंट ड्राइविंग टेस्ट के दौरान ट्रैक पर चार पहिया वाहन का टेस्ट देने वाले कुछ एप्लीकेंट को बाहर खड़ा उनका साथी मोबाइल फोन के जरिए लगातार गाइड करता नजर आया। साथी बाहर से फोन पर निर्देश देता रहा और एप्लीकेंट उसी के अनुसार टेस्ट देने की कोशिश करता रहा। खास बात यह है कि ट्रैक पर टेस्ट देने से पहले एप्लीकेंट को गाड़ी किस तरह चलानी है और निर्धारित समय में टेस्ट कैसे पूरा करना है, इसकी जानकारी पहले ही दी जाती है। इसके बावजूद बाहर से फोन के जरिए गाइड करने का यह तरीका ट्रैक की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।