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एसआईआर : तहसीलदार वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त साइन कराने दफ्तर पहुंचे लोग 4-5 घंटे होते रहे तंग

भास्कर न्यूज | अमृतसर सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत दस्तावेजों की जांच करवाने तहसील दफ्तर पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकारी सिस्टम की बदइंतजामी का आलम यह रहा कि लोगों को दफ्तर बुला लिया गया मगर अधिकारी वीआईपी ड्यूटी पर चले गए। तहसीलदार-2 के दफ्तर में अव्यवस्था का यही नजारा देखने को मिला। लोग सुबह 11 बजे ही अपने जरूरी काम के लिए दफ्तर पहुंच गए थे लेकिन वहां तहसीलदार रुपिंदरपाल सिंह बल मौजूद नहीं थे। लोग करीब 4-5 घंटे तहसीलदार का इंतजार करते रहे। हैरानी की बात तो यह रही कि बैठने तक का इंतजाम नहीं था। नतीजतन लोगों को जमीन पर बैठकर अधिकारी का इंतजार करना पड़ा। सरकार व प्रशासन के उन दावों को भी वह कोसते रहे, जिसमें कहा जा रहा है कि सरकारी दफ्तरों के हालात सुधार दिए गए है। तहसीलदार रुपिंदर पाल सिंह बल का कहना था कि ड्रग सेंसस के डायरेक्टर अमृतसर आए थे। उनके आगमन को लेकर उनकी वीआईपी डयूटी लगा दी गई, जिसके चलते दफ्तर में नहीं आ सके। जैसे ही वह इस डयूटी से फ्री हुए, वह तुरंत अपने दफ्तर में आ गए और लोगों के काम को पहल के आधार पर निपटाया। दफ्तर में बैठने के बंदोबस्त न होने पर उन्होंने कहा कि वह इस संबंधी अधिकारियों को अवगत करवाएंगे, ताकि लोगों की आगे से किसी तरह की परेशानी न हो सके। महिंद्रा कालोनी निवासी निशा ने बताया कि सुबह 11 बजे फार्म लेकर आई थीं। पूछने पर बताया गया कि तहसीलदार वीआईपी ड्यूटी पर हैं। भूखे-प्यासे शाम तक इंतजार करना पड़ा। अगर अधिकारी को जाना ही था तो प्रशासन को किसी अन्य अधिकारी को तैनात करना चाहिए था। इस तरह की व्यवस्था से आम लोगों को परेशानी होती है। बटाला रोड निवासी तकदीर ठाकुर का कहना है कि उनकी पत्नी बीमार है। उसे बीमार हालत में घर छोड़कर आया हूं। वह तो सोच रहे थे कि जल्द ही फ्री होकर वह घर आ जाएंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस अधिकारी के उन्होंने हस्ताक्षर करवाने हैं, वह दफ्तर नहीं बैठेंगे और उन्हें घंटो इंतजार करना पड़ेगा। वह 12 बजे के करीब दफ्तर पहुंचे थे । उन्हें कितनी परेशानी झेलनी पड़ी है, यह उन्हें ही पता है। प्रीत नगर निवासी रितु का कहना था कि आम जनता को अधिकारियों द्वारा परेशान करने की एक आदत बन गई है। रितु का कहना था कि वह सुबह 11.30 बजे से दफ्तर आई थी। करीब 3.30 बजे तक दफ्तर में कोई भी नहीं आया। उन्हें यहीं कहा जाता रहा कि अभी तहसीलदार आ जाएंगे तो साइन कर देंगे। सरकार के दफ्तरों में सुधार के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। तहसील टू दफ्तर के बाहर जमीन पर बैठे लोग।

📰 Editorial Attribution: Originally reported by पंजाब | दैनिक भास्कर ↗. Curated and contextualized by the Chandigarh Daily news desk.